![फ़ितना व फ़साद करने की सजा](https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiGUWfHt7nEndB3lDQwWO22TsvHcQs5aLX07440sl_XTpG81FCGPMECJaCdpKnsAbh0028o-gerFk2aWmH2ylIKVDtXNQPEdqYpmZRG_9bHgJgdXximj4kGfcmZYQ4fV_laQmR7pxI4GkWt/w700/1617905094119742-0.png)
एक गुनाह के बारे में
फ़ितना व फ़साद करने की सजा
कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है :
" जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से लड़ते हैं , जमीन में फ़साद करने की कोशिश करते हैं , ऐसे लोगों की बस यही सज़ा है के वह क़त्ल कर दिए जाएँ या सूली पर चढ़ा दिए जाएँ या उन के हाथ और पाँव मुखालिफ जानिब से काटे जाएँ या वह मुल्क से बाहर निकाल दिए जाएँ । यह सज़ा उन के लिए दुनिया में सख्त रुस्वाई का ज़रिया है और आखिरत में उन के लिए बहुत बड़ा अज़ाब है । "
[ सूर - ए - माइदा : 33 ]
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